Meditation
गायत्री मंत्र जप की सरल विधि
साधारण साधकों (common sadhaks) के लिए गायत्री मंत्र जप की सरल विधि, उसके नियम और शास्त्रों की मान्यताओं को यहाँ बहुत ही सरल और सुबोध हिंदी में समझाया गया है:
1. क्या गायत्री मंत्र का जप 'उपांशु' होना चाहिए? (जप के प्रकार)

शास्त्रों और योग विज्ञान के अनुसार, जप के मुख्य रूप से तीन प्रकार होते हैं:
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वाचिक जप (Vaikhari Japa): इसमें मंत्र को बोलकर स्पष्ट आवाज में जपा जाता है । यह शुरुआत करने वाले साधकों और बच्चों के लिए मन को केंद्रित करने का सबसे अच्छा तरीका है ।
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उपांशु जप (Upanshu Japa): इसमें साधक के होंठ और जीभ तो हिलते हैं, लेकिन कोई आवाज बाहर नहीं आती। आपके बिल्कुल पास बैठा व्यक्ति भी यह नहीं सुन सकता कि आप क्या जप रहे हैं। मनुस्मृति के अनुसार, यह साधारण वाचिक जप से 100 गुना अधिक फलदायी होता है ।
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मानसिक जप (Manasika Japa): इसमें न तो होंठ हिलते हैं और न ही जीभ। साधक शांत होकर मन ही मन मंत्र के प्रत्येक अक्षर का मानसिक रूप से स्मरण और ध्यान करता है । यह जप सबसे शक्तिशाली माना जाता है और इसका फल 1000 गुना अधिक होता है ।
साधक के लिए निर्देश: हाँ, गायत्री मंत्र का जप करने के लिए उपांशु और मानसिक जप को ही सबसे उत्तम और शास्त्र-सम्मत माना गया है । शुरुआत में आप वाचिक जप से अभ्यास कर सकते हैं, लेकिन धीरे-धीरे अभ्यास होने पर इसे उपांशु और अंततः मानसिक जप में बदलें।
2. साधारण साधक के लिए गायत्री जप के नियम (Rules for Sadhana)
यदि आप घर पर नियमित रूप से गायत्री साधना करना चाहते हैं, तो इन सरल नियमों का पालन करें :

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शरीर की शुद्धि: जप से पहले स्नान करना सबसे उत्तम है । यदि कोई बीमारी या लाचारी हो, तो हाथ-पैर और मुँह धोकर या गीले कपड़े से शरीर पोंछकर भी जप शुरू कर सकते हैं ।
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पवित्र वस्त्र: स्वच्छ, ढीले और आरामदायक वस्त्र पहनें ।
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आसन का चुनाव: कभी भी खाली जमीन पर बैठकर जप न करें । इससे जप के दौरान शरीर में उत्पन्न हुई आध्यात्मिक ऊर्जा धरती में चली जाती है । बैठने के लिए कुशा (Kusha) घास का आसन सबसे उत्तम है, न होने पर सूती (cotton) या ऊनी आसन का उपयोग करें ।
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शरीर की स्थिति: बैठते समय अपनी रीढ़ की हड्डी (Spine) को बिल्कुल सीधा रखें । इससे सुषुम्ना नाड़ी में प्राण का प्रवाह बिना किसी बाधा के होता है ।
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दिशा: सुबह के समय पूर्व दिशा (सूर्य की ओर) और शाम के समय पश्चिम दिशा की ओर मुख करके बैठें ।
3. माला, समय और संख्या का नियम
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माला (Mala): जप के लिए तुलसी या सफेद चंदन की माला का उपयोग करें । माला फेरते समय कभी भी तर्जनी (index finger - अंगूठे के बगल वाली उंगली) से माला को न छुएं। केवल अंगूठे और मध्यमा (middle finger) उंगली से माला को आगे बढ़ाएं।
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सही समय (त्रिकाल संध्या): गायत्री मंत्र का जप दिन के तीन संधि कालों (जंक्शन) पर किया जाना चाहिए :
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प्रातः काल: सूर्योदय से पहले (सुबह 4:00 से 6:00 बजे के बीच) ।
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मध्याह्न (दोपहर): जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर हो ।
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सायं काल: सूर्यास्त के समय । (ध्यान दें कि दोपहर के बाद या देर रात को—विशेष तांत्रिक साधना को छोड़कर—साधारण गायत्री का जप नहीं किया जाता है ।)
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दैनिक संख्या: नित्य कम से कम 108 बार (एक माला) जप का नियम लें । यदि समय की कमी हो, तो तीनों समय 36-36 बार जप कर सकते हैं ।
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मंत्र बोलते समय विराम (Pauses): मंत्र को बिना रुके एक बार में न बोलें, बल्कि इन 5 स्थानों पर थोड़ा विराम दें :
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ॐ (विराम) भूर्भुवः स्वः (विराम) तत्सवितुर्वरेण्यं (विराम) भर्गो देवस्य धीमहि (विराम) धियो यो नः प्रचोदयात् (विराम) ।
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4. प्रायश्चित और त्रुटि सुधार (Penance)
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यदि जप के दौरान लघुशंका (toilet) आदि के लिए उठना पड़े, तो पुनः हाथ-मुँह धोकर बैठें और व्यवधान के प्रायश्चित के रूप में एक अतिरिक्त माला का जप करें ।
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यदि किसी दिन किसी कारणवश जप छूट जाए, तो अगले दिन उस कमी को पूरा करने के लिए अतिरिक्त जप करें ।
5. व्यावहारिक भ्रांतियों का निवारण (Myths and FAQs)
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क्या महिलाएं जप कर सकती हैं? हाँ, बिल्कुल! यह पूरी तरह से गलत धारणा है कि महिलाएं गायत्री मंत्र नहीं जप सकतीं । सभी आधुनिक संतों और शास्त्रों के अनुसार, महिलाएं बिना किसी संकोच के और मासिक धर्म के समय भी शुद्ध मन से जप कर सकती हैं ।
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क्या गायत्री मंत्र कीलित या शापित है? नहीं, गायत्री आदिशक्ति और ईश्वर की परम शक्ति है । गायत्री जैसे वैदिक मंत्रों को किसी तांत्रिक "शापमुक्ति" या "कीलन खोलने" की आवश्यकता नहीं होती, बशर्ते आपका उद्देश्य केवल आत्म-कल्याण और आध्यात्मिक प्रगति हो ।
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आहार-विहार का नियम: गायत्री मंत्र का नियमित जप करने वाले साधक को भोजन में सात्विकता अपनानी चाहिए और मांसाहार से पूरी तरह दूर रहना चाहिए।
इस प्रकार नियमों का सहज पालन करते हुए श्रद्धापूर्वक किया गया उपांशु या मानसिक जप साधक के जीवन में सुख, बुद्धि और मानसिक शांति का संचार करता है ।
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