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Scriptural Reasoning

Ansha Kala Devis: The 26 Facets of Primordial Feminine Energy

This text provides an insightful breakdown of the 26 "Ansha Kala Devis"—the partial manifestations of feminine energy that shape, govern, and balance human life and nature.

By Ashish Kumar 1 min read

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अंशकलादेवी

स्त्री ऊर्जा के कई आंशिक रूप हैं जो वास्तव में प्रकृति के विभिन्न रूप में से हैं और कुछ लोग उनकी प्रार्थना करते हैं कि वे हमें हमारे जीवन को शांतिपूर्वक चलाने में सहायता करें, जबकि अन्य कुछ रूपों से लोग डरते हैं ऊर्जा के इन आंशिक रूपों की देवियों को ‘अंश कला देवी’ कहा जाता है । अंशकला देवी दोनों प्रकार की होती हैं जो हमारे जीवन को शांतिपूर्ण बनाती हैं और जिनसे हम डरते हैं । स्त्री ऊर्जा के आंशिक चरणों की मुख्य 26 अंशकला देवी है:

1) स्वाहादेवी (अर्थ: माध्यमकीदेवी):  स्वाहा देवी वो माध्यम है जिससे अग्नि में डाली गयी वस्तु भस्म होकर शुद्ध होती है । वह अग्नि की पत्नी है । स्वाहा की दुनिया भर में पूजा की जाती है । यदि हव्य (oblation) उनके नाम को दोहराए बिना अर्पण किया जाता है, तो देवता इसे स्वीकार नहीं करते हैं ।

2) दक्षिणादेवी (अर्थ: दानकीदेवी): ये यज्ञ के पूरा होने के बाद धन के रूप में पुरोहित को दिए जाने वाले दान की देवी है । वह यज्ञ देव (बलिदान के देवता) की पत्नी है इस देवी के बिना, दुनिया के सभी कर्म व्यर्थ हो जाएंगे ।

3) दीक्षादेवी (अर्थ: यज्ञकेअनुसारसंकल्पपूर्णदानकीदेवी):  भोजन या कपड़े आदि के रूप में दान की देवी, जिसे उनके द्वारा यज्ञ पूरा करने के बाद पुजारी को दिया जाता है । वह यज्ञ देव की पत्नी है, यह देवी शुद्ध ज्ञान प्रदान करती है ।

4) स्वधादेवी (अर्थ: पितरोंकेनिमित्तदियाजानेवालाअन्नयाभोजनकीदेवी): आत्म-शक्ति, शासन, अपनी जगह या घर की देवी । ये प्रथा, प्रचलन या आदत अदि को संदर्भित करती है । यह देवी पितृ (मृतक पूर्वजों) की पत्नी है, जिनकी मनुष्यों द्वारा पूजा की जाती है । इस देवी का सम्मान किए बिना पितरों को दिया गया चढ़ावा व्यर्थ साबित होता है ।

5) स्वेच्छादेवी (अर्थ: अपनीइच्छाकीदेवी):  यह इच्छा की देवी है जो अच्छा करती है । यह वायु की पत्नी है । अगर स्वेच्छा से उपहार नहीं दिया जाता है तो उपहारों का कोई फायदा नहीं होता ।

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6) पुष्टिदेवी (अर्थ: पोषणकीदेवी): यह पोषण या अनुमोदन की देवी है और गणपति की पत्नी है । यदि यह देवी अस्तित्व में ना हो, तो पुरुष और स्त्री कमजोर हो जाएँगे, क्योंकि वह सभी ताकतों का स्रोत है ।

7) तुष्टिदेवी (अर्थ: तुष्टहोनेकीअवस्थाकीदेवी): शांति या खुशी की देवी । यह अनंत की पत्नी है । अगर यह देवी अस्तित्व में ना हो तो दुनिया में कोई खुशी नहीं होगी ।

8) संपत्तिदेवी (अर्थ: धनदौलतजायदादआदिजोकिसीकेअधिकारमेंहोऔरखरीदीयाबेचीजासकतीहोकीदेवी): संपत्ति की देवी । यह इशाना (अमीर) की पत्नी है । अगर यह देवी अस्तित्व में नहीं रहती तो पूरी दुनिया गरीब और स्वदेशी हो जाएगी ।

9) धरतीदेवी (अर्थ: भूमिकीदेवी): यह दृढ़ संकल्प की देवी एवं कपिल (अर्थ: लाल भूरे रंग) की पत्नी है । अगर यह देवी अस्तित्व में नहीं रहती है तो पूरी दुनिया भयानक और डरपोक हो जायेंगी ।

10) सतीदेवी (अर्थ: सतकीदेवी): सत्त्व की देवी जो मानव में सभी अच्छी गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार है । वह सत्य (सत्य) की पत्नी है । अगर यह देवी अस्तित्व में नहीं रहती है तो लोगों के बीच कोई मित्रता और शांति नहीं होगी ।

11) दयादेवी (अर्थ: करुणाऔरसहानुभूतिकीदेवी): करुणा और सहानुभूति की देवी । यह मोह (भ्रम, सुस्तता) की पत्नी है । यदि यह देवी अस्तित्व में नहीं रहती है तो दुनिया नरक हो जाएगी और एक भयंकर युद्ध क्षेत्र बन जाएगी ।

12) प्रतिष्ठादेवी (अर्थ: ख्यातिकीदेवी): प्रतिष्ठा की देवी । यह पुण्य (दान, इनाम) की पत्नी है । अगर यह देवी अस्तित्व में नहीं रहती है तो दुनिया ख़त्म हो जाएगी ।

13) सिद्धदेवी (अर्थ: परिपूर्णकरनेवालीदेवी), और कीर्तिदेवी (अर्थ: प्रसिद्धिकीदेवी): ये दोनों सुकर्मा (अर्थ: अच्छा स्वभाव) की पत्नियां हैं । अगर वे अस्तित्व में ना रहें तो पूरी दुनिया प्रतिष्ठा से बेकार हो जाएगी और मृत शरीर की तरह निर्जीव हो जाएगी ।

14) क्रियादेवी: कार्य की देवी वह उद्योग (अर्थ: व्यापार) की पत्नी है । अगर वह अस्तित्व में नहीं रहती है तो पूरी दुनिया निष्क्रिय हो जाएगी और कार्य करना बंद कर देगी ।

15) मिथ्यादेवी (अर्थ: झूठीमान्यताओंकीदेवी): वह अधर्म (अप्राकृतिकता, गलतता) की पत्नी है । हठी और चरित्रहीन लोग इस देवी की पूजा करते हैं । अगर यह देवी पूरी दुनिया में अस्तित्व में नहीं रहती है तो ब्राह्मण ही अस्तित्व में नहीं रहेगा । सत युग के दौरान दुनिया में कहीं भी यह देवी दिखाई नहीं देती थी । वह त्रेता युग के दौरान यहाँ और वहाँ एक सूक्ष्म रूप में दिखाई देने लगी थी । द्वापार युग में उन्होंने अधिक विकास प्राप्त किया और फिर उनके अंग और मजबूत हो गए । कलियुग में वह अपने पूर्ण स्तर और विकास के रूप में विकसित हुई और अपने भाई कपट (अर्थ :धोखा) के साथ हर जगह चली आयी ।

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16) शांतिदेवी (अर्थ: शांतिकीदेवी) और लज्जादेवी (अर्थ: विनम्रताकीदेवी): ये दो देवी अच्छी प्रकृति की हैं । अगर वे अस्तित्व में ना रहे तो दुनिया सुस्त और आलसी हो जाएगी ।

17) बुद्धिदेवी (अर्थ: समझनेऔरजाननेकीइच्छाकीदेवी), मेधादेवी (अर्थ: ज्ञानकीदेवी) और धृतदेवी (अर्थ: संभालेरखनेकीदेवी): यह तीनों देवियाँ ज्ञान की पत्नियां है । अगर ये देवियाँ अस्तित्व में ना रहे तो दुनिया अज्ञानता और मूर्खता में डूब जाएगी ।

18) मूर्ति (अर्थ: रूपोंकीदेवी): वह धर्म (सही कर्तव्य) की पत्नी है । उनकी अनुपस्थिति में सार्वभौमिक आत्मा जीवन शक्ति से विरक्त, असहाय और अर्थहीन हो जाएगी ।

19) श्रीदेवी: यह सौंदर्य और समृद्धि की देवी है । वह माली की पत्नी है । इनकी अनुपस्थिति दुनिया को निर्जीव बना देगी ।

20) निन्द्रादेवी: यह नींद की देवी है । यह कालाग्नि (समय की अग्नि) की पत्नी है । ये देवी रात्रि के दौरान दुनिया में हर किसी को प्रभावित करती है और उनकी चेतना को खो कर उन्हें नींद में डाल देती है । इस देवी की अनुपस्थिति में दुनिया एक पागलों की शरण स्थली बन जाएगी ।

21) रात्री (अर्थ: रात्रिकीदेवी), संध्या (अर्थ: शामकीदेवी) औरदिवस (अर्थ: दिनकीदेवी): ये तीनों काल (अर्थ: समय) की पत्नियां हैं । उनकी अनुपस्थिति में किसी को भी समय की कोई समझ नहीं होगी और कोई भी समय की गणना और निर्धारण करने में सक्षम नहीं होगा ।

22) विसापू (अर्थ: यहभूखकीदेवीहै) औरदहम (अर्थ: यहप्यासकीदेवीहै): ये दो देवियाँ लोभ (अर्थ: लालच) की पत्नियाँ हैं, वे दुनिया को प्रभावित करती हैं और इस तरह उन्हें चिंतित और दुखी बनाती हैं ।

23) प्रभादेवी (अर्थ: प्रकाशकीदेवी) औरदहकदेवी (अर्थ: अग्निसेउत्पन्नप्रकाशऔरगर्मीकीदेवी): ये दोनों तेजस की पत्नियां हैं इनके बिना भगवान को सृष्टि के कार्य को जारी रखना असंभव हो जायेगा ।

24) मृत्युदेवी (अर्थ: मृत्युकीदेवी) औरजरादेवी (अर्थ: मातृत्वकीदेवी): ये दोनों प्रकृस्ताजवारा (अर्थ: अनिर्मित भगवान), और काल (अर्थ: समय) की पुत्री हैं । और यदि ये अस्तित्व में रहना बंद कर देती हैं, तो ब्रह्मा नयी रचना नहीं बना सकते हैं । क्योंकि मृत्यु सृजन, जन्म की पूर्व शर्त है । यदि कोई मृत्यु नहीं है तो जन्म भी नहीं है ।

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25) तन्द्रादेवी (अर्थ: नींदकीझपकी) औरप्रीति (अर्थ: खुशीकीदेवीजोप्रेमसेआतीहै): ये दोनों निद्रा (अर्थ: नींद) की पुत्रियाँ हैं और सुख (अर्थ: खुशी) की पत्नियाँ हैं । ये देवी ब्रह्मा के आदेश पर दुनिया भर में घूमती रहती हैं ।

26) श्रद्धादेवी (अर्थ: भक्तिकेविश्वास) औरभक्तिदेवी (अर्थ: वैराग्यकीदेवी): ये देवी सांसारिक सुखों के प्रति उलझन और दुनिया के लोगों की आत्माओं को मोक्ष देती हैं ।

आप इन देवी-देवताओं के महत्व को समझ सकते हैं । मैं आपको इनमें से 1 के विषय में बता देता हूँ । सबसे पहले 'स्वाहा देवी' को ले लो, जो हमारी भेंट को अग्नि को देती है। इसे अन्यथा लें, जब हम भोजन खाते हैं तो यह हमारे पेट में पहुँचता है जहाँ जठारग्नि (पेट में भोजन के पाचन के लिए जिम्मेदार अग्नि) इसे पचती है । तो क्या 'स्वाहा देवी' से ये प्रार्थना करना गलत है, की 'कृपया देवी मेरे द्वारा खाया हुआ भोजन पचाकर मुझे स्वस्थ बनाएं'। इसी प्रकार यदि हम अग्नि को कुछ भी देते हैं तो हम स्वाहा देवी' से प्रार्थना करते हैं ताकि यह जलने के बाद एक या दूसरे रूप में उपयोगी हो सके ।

Written by

Ashish Kumar

Born in Haridwar on 18 September 1980, Ashish grew up in a simple middle-class family rooted in service, discipline, and humility. From an early age, he was deeply curious about both science and Hindu philosophy, creating a lifelong journey that blended rational inquiry with spiritual exploration. A major turning point came in 1999, when a life-threatening illness brought him close to death. That experience transformed his outlook and gave him a powerful purpose: to dedicate his life to helping others. Although he later completed his engineering education and worked in IT, his path was shaped more by struggle than comfort. Repeated setbacks, career disappointments, health issues, and inner restlessness pushed him toward deeper reflection and self-discovery. Over time, Ashish immersed himself in scriptures, meditation, Tantra, Ayurveda, and multiple schools of Indian philosophy, while also studying science, technology, and cosmology. This rare combination of spiritual depth and scientific curiosity became the foundation of his writings and research. His books and papers reflect an effort to unite ancient wisdom with modern understanding. His journey is not only about personal survival, but about transformation through adversity. From illness and uncertainty to writing, research, and philosophical inquiry, Ashish’s life represents the search for truth, meaning, and purpose. His story is important because it shows how suffering can become a force for growth, and how science and spirituality can together shape a meaningful life.

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